सत श्री अकाल
त्रिकाल समग्र दर्शन
मन तेरो दर्शन जाय अधुरो
यही तो माया मात रे
प्रार्थना करने से अहमून है
समा जाने में नही ।
इसीलिए प्रार्थना से बेटर ध्यान है ।
परम के अस्तित्व से ही काल है ।
अकाल सिख है न ।
यह काल और अवकाश दो हुए।
काल के कारण गति का होना ।
यही से वायु ।
आत्मतत्व से महा विस्फोटक शक्ति युक्त अणु का होना ।
फिर के अणु रचना ।
जो एलीमेन्ट कम्पाउंड मिक्सचर ।
धातु मूल जीव।
यह काल और अवकाश दो हुए।
काल के कारण गति का होना ।
यही से वायु ।
आत्मतत्व से महा विस्फोटक शक्ति युक्त अणु का होना ।
फिर के अणु रचना ।
जो एलीमेन्ट कम्पाउंड मिक्सचर ।
धातु मूल जीव।
सब कहा पांच इन्द्रिय वाले है ।अलसिया को तो आंख ही नही होती है
देव योनि मनुष्य से ऊपर है
ते देवा: भावयन्तु न: ।

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