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आत्म तत्व पहचान

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 परमात्मा के अंश आत्माए जैसे सूरज और उसकी किरणे!! नरसिह महेता कहते है .. जब तक आत्म तत्व का चिंतन नही होता है तब तक हरेक साधना जूठी है । अनेक आत्मा ,परमात्मा के अंश,जैसे अवकाश माया में सितारे । तारे बन जाते है ।जाता कोई नही है ।  सितारों तुम तो सो जाओ .... આ તો સામે જ છે મન ની ગતિ રાગ અને દ્વેષ !! हरदेवी हरि काल अवकाश परमात्मा મન ગતિ છાંડે નહિ નહિ આતમ પ ર કાશ નાશ તણો અંધાર નો સ ત સ ત ના અ હો રાત આપણે તો પ્રતિ કર્મ જ કરી એ છીએ માયા ને એડજેસ્ટ કરતા આવડે છે તેથી તો પ્રકાશ ની ગતિ જણાય છે સહજ જગા કર રહી માયા  બસ આ પ્રક્રિયા ગતિ તરીકે ઓળખાય છે.કઈક મન.પ્રકૃતિ અને પરમાત્મા વચ્ચે નો તાંતણો!! મન કી દીશા સહી સત્ય અનેકી મણીપુર ચક્રે 10 દિશા પણ કેન્દ્ર એ અગિયારમી દિશા આ બધા સિવાય 12 મી શ્રીહરિ .તેથી જ પ્રભુ નું જ કેન્દ્ર.બુદ્ધ.  

गोपाल ज्ञानी

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  गोपाल ज्ञानी ..मैं एक गोपाल की बात कर चुका हूं ।यह उपनिषद में है । गायो का चौराहा अर्थात गायो को चरवाने वाला आत्मज्ञान पाने की लिए ऋषि को मिलता है ।ऋषि कहते है पहले तू कुछ शास्त्रो समज । यह गोपाल बहु कुछ जान कर वर्षो बाद ऋषि को ये ज्ञान अवगत कराने को जाता है ।ऋषि कहते है तुजे अभी भी बहोत शिखना होगा ।धर्मो धर्मग्रंथो को जान । फिर यह गोपाल इसमे भी की वर्ष निकाल कर ज्ञान प्राप्ति कर ऋषि को मिलता है ।फिरभी ऋषि उसे वेद को समझना कहते है ।बहु वर्ष बीते ऋषि के पास फिरसे पहोचता है । ऋषि मैं अब क्या करूँ ? ऋषि पूछते है । क्या तुम इन पेड़ों के पत्तो में वेद पढ़ सकते हो । अगर नही तो तुजे बहोत चिंतन करना जरूर है ।अब यह गोपाल चिंतन में खो जाता । कई वर्ष गुजर जाने के बात फिर  ऋषि के पास आता है ।ऋषि मैं अब क्या करूँ ? ऋषि पूछते है । क्या तुम इन पेड़ों के पत्तो में वेद पढ़ सकते हो । गोपाल जवाब देता है हा मैं चिंतन में खो गया हूं मुजे तो पेड़ में क्या आप मे भी सर्वत्र में वेद समज आ रहा है ।मैं स्वयं धन्य हु । अब क्या करूँ ?  ऋषि हस कर बोले  यहां आने से पहले तू क्या करता था । जवाब दिया चि...