समझना ये होगा कि आतम तो प्रकाशता ही एक जगह से है। दूसरे की बात अगर कीर्ति पाना है तो है । उसकी नासमझ क्लास के स्टूडेंट जैसी है । आवरण लगा है अज्ञान का जो। प्रकाश लेगा अपने हिसाब से।किसकी तड़प है ? हजारो अज्ञानी ओ !!लेकिन मूल में तो वही है !! यह ज्ञान वैराग्य के बिना क्या?