साक्षी भाव
कमाल तो देखो स्वप्न ये दुनिया निद्रा का मैं साक्षी !! अरे ये साक्षी भी प्रभु का सपने सभी याद नही रहते है । और कई विचार हम बिना काम के कर लेते है । मैंने एकबार देखा था एक आदमी कबूतरों को दाना डालता था। सब दाने खा रहे थे । बस उस आदमी को आत्मा समजो और कबूतरों को कोष । अर्थात हजारो लाखो की संख्या में कोष यह आत्मा नामके सूरज से जीवन प्रकाश पा रहे है । यह पूरा चित्र देह का है । जैसे एक मधुमख्खी का पुडा । विविध आकृतियां शेर मनुष्य पंखी बनाती है । the power of the GOD is at work.