अभ्यास वैराग्य
शिष्य बनत कभी देव दैत्य पी के इलम को जाम अभ्यास का कम होना और वैराग्य का बढ़ना । बाल्यावस्था अभ्यास है । युवा वस्था में दोनो है । वृद्धावस्था में वैराग्य । यही तो बात है ।
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