जीव प्रकाश जानी यदी मानी

 गलत लोगो को सुनाये गाने

इससे बड़ी सजा है क्या

बेक़दरो से करके प्यार

उम्र गवाई हमने यार





भोगदा खरीददार कदरदान 

मिल जाते है सबको कहा !!

 ओ बरसात !जमीन को मत ढूढ !!



मैं बरसात हु या धोध

अब पड़ा न मालूम

गति हो या स्पेस


बस यही तो लें दें है 



विविध रूप से प्रार्थना होती है ।

अतः सबकी अलग है किन्तु एक के लिये ।

 कोई किसीको पूरा नही समजा शकता ।

क्योकि कुछ तो दूसरे के पास  है ही ।ये अधूरा पन का ज्ञान ही ज्ञान है ।


वैसे तो मेरा कुछ भी नही है ।

लेकिन ये सब जिसका है वो जिसका है उसीका ही मैं हु ।

जीव प्रकाश जानी यदी मानी 


त्रिकाल समग्र दर्शन 

मन तेरो दर्शन जाय अधुरो

यही तो माया मात रे

प्रार्थना करने से अहमून है

समा जाने में नही ।

इसीलिए प्रार्थना से बेटर ध्यान है ।


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